खानकाह-ए-वामीकिया निशातया में उर्स-ए-चेलूम की रूहानी महफिल, सैय्यद असलम मियां की हुई दस्तारबंदी



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

देशभर से पहुंचे सज्जादानशीन, उलमा और अकीदतमंदों ने दी मुबारकबाद; अमन-ओ-भाईचारे की मांगी दुआएं

बरेली। सूफी परंपरा, इश्क-ए-इलाही और खानकाही रिवायतों का खूबसूरत संगम उस वक्त देखने को मिला, जब  खानकाह-ए-वामीकिया निशातया में तीसरे साहिबे सज्जादा हजरत सैय्यद मोहम्मद मियां वामीकी रहमतुल्लाह अलैह का उर्स-ए-चेलूम पूरे अदब, एहतराम और अकीदत के साथ मनाया गया।
इस रूहानी आयोजन में हिंदुस्तान के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम, सज्जादानशीन, सूफी बुजुर्गों के मानने वाले और हजारों जायरीन शामिल हुए। खानकाह का माहौल दरूदो-सलाम, कुरआनख्वानी और जिक्र-ओ-अजकार से पूरी तरह रूहानी रंग में रंगा नजर आया।
महफिल-ए-दस्तारबंदी बनी आकर्षण का केंद्र

उर्स-ए-चेलूम की सबसे अहम और ख़ास रस्म महफिल-ए-दस्तारबंदी रही, जिसमें खानकाह की जिम्मेदारियां सैय्यद असलम मियां को सौंपते हुए उनके सर पर दस्तार बांधी गई। देशभर से आए बुजुर्ग सज्जादानशीनों और उलमा ने उन्हें मुबारकबाद पेश की और दुआ की कि वह खानकाह की रिवायतों, सूफी शिक्षाओं और दीनी खिदमात को आगे बढ़ाएं।
दस्तारबंदी की रस्म के दौरान पूरा माहौल भावुक और रूहानी नजर आया। मौजूद अकीदतमंदों ने नारे-ए-तकबीर और दरूदो-सलाम के साथ अपनी खुशी का इजहार किया।

अजमेर, कलियर और किछौछा शरीफ से पहुंचे सज्जादानशीन

इस अकीदतमंदाना आयोजन में देश की कई मशहूर दरगाहों के सज्जादानशीनों ने शिरकत की। खास तौर पर अजमेर शरीफ, कलियर शरीफ, किछौछा शरीफ समेत कई सूफी केंद्रों से आए प्रतिनिधियों ने हज़रत वामीकी मियां रहमतुल्लाह अलैह की दीनी, रूहानी और समाजी खिदमात को याद किया।
उलमा ने अपने खिताब में कहा कि खानकाहें हमेशा से मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का पैगाम देती रही हैं। आज के दौर में सूफी शिक्षाओं की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है।

जायरीनों का उमड़ा सैलाब, लंगर-ए-आम का हुआ आयोजन

उर्स के मौके पर दूर-दराज इलाकों से बड़ी संख्या में जायरीन खानकाह पहुंचे। जायरीनों के लिए लंगर-ए-आम का ख़ास इंतजाम किया गया, जहां लोगों ने मिल-बैठकर खाना खाया और सूफी परंपरा की गंगा-जमुनी तहजीब का नज़ारा पेश किया।
खानकाह परिसर में सुरक्षा और इंतजामात भी बेहतर तरीके से किए गए थे। पूरी रात चलने वाली महफिलों में नात, मनकबत और तकरीरों का सिलसिला जारी रहा।

मुल्क में अमन-चैन और तरक्की के लिए हुई खास दुआ

उर्स-ए-चेलूम के समापन पर मुल्क में अमन-ओ-अमान, भाईचारे, खुशहाली और इंसानियत की बेहतरी के लिए विशेष दुआ की गई। सज्जादानशीनों और उलमा ने लोगों से नफ़रत छोड़कर मोहब्बत और इंसानियत का रास्ता अपनाने की अपील भी की।

मुख्य आकर्षण

तीसरे साहिबे सज्जादा हज़रत सैय्यद मोहम्मद मियां वामीकी रहमतुल्लाह अलैह का उर्स-ए-चेलूम
सैय्यद असलम मियां की दस्तारबंदी
अजमेर शरीफ, कलियर शरीफ और किछौछा शरीफ से सज्जादानशीनों की शिरकत
लंगर-ए-आम और रूहानी महफिलों का आयोजन
मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे के लिए विशेष

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