यूपी में आंगनबाड़ी पोषाहार वितरण पर बड़ा विवाद: 29 अरब रुपये के THR टेंडर में अनियमितताओं के आरोप, लाखों बच्चे और गर्भवती महिलाएं प्रभावित



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

दो महीने से टेक होम राशन वितरण ठप, भाजपा MLC ने उठाए भ्रष्टाचार और कार्टलाइजेशन के गंभीर सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े लाखों बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को वितरित किए जाने वाले टेक होम राशन (THR) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रदेश में अप्रैल और मई माह बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लाभार्थियों को पोषाहार उपलब्ध नहीं हो सका है। इस बीच लगभग 29 अरब रुपये के THR टेंडर में गंभीर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और कार्टलाइजेशन के आरोपों ने मामला और गरमा दिया है।
भाजपा विधान परिषद सदस्य (MLC) डॉ. रतनपाल सिंह तथा जयपाल सिंह व्यस्त ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए संबंधित विभागों और अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। दोनों जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पोषाहार आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और नियमों की अनदेखी कर कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया है।
ब्लैकलिस्ट कंपनी को टेंडर देने पर उठे सवाल
विवाद का केंद्र JVS Foods नामक कंपनी है, जिसे कथित रूप से वर्ष 2020 में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद कंपनी को लगभग 27.68 अरब रुपये का बड़ा टेंडर प्रदान किया गया। इस फैसले पर सवाल उठाते हुए विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी कंपनी का पूर्व रिकॉर्ड विवादित रहा है तो उसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने से पहले विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई।
NAFED और ICDS भी सवालों के घेरे में
मामले में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान प्रतिस्पर्धा को सीमित कर कार्टलाइजेशन को बढ़ावा दिया गया, जिससे कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिला।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया, पात्रता शर्तों और चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
बाजार से माल खरीदकर सप्लाई करने का आरोप
JVS Foods पर यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी अपनी उत्पादन इकाइयों में पर्याप्त मात्रा में पोषाहार तैयार करने के बजाय खुले बाजार से सामग्री खरीदकर उसकी आपूर्ति करती रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह टेंडर की शर्तों और गुणवत्ता मानकों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।
लाखों लाभार्थियों पर पड़ा असर
प्रदेश में आंगनबाड़ी सेवाओं के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण उपलब्ध कराने की योजना संचालित की जाती है। लेकिन दो महीने से पोषाहार वितरण प्रभावित होने के कारण लाखों लाभार्थियों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की देरी का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य, विकास और कुपोषण उन्मूलन के प्रयासों पर पड़ता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी नियमित पोषाहार अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
भाजपा MLC डॉ. रतनपाल सिंह और जयपाल सिंह व्यस्त ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों और महिलाओं तक समय पर पोषाहार पहुंचाना होनी चाहिए तथा वितरण व्यवस्था में आई बाधाओं को तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
मुख्य बिंदु
अप्रैल और मई माह में THR वितरण प्रभावित।
लाखों बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाएं पोषाहार से वंचित।
29 अरब रुपये के टेंडर में अनियमितताओं के आरोप।
JVS Foods को 27.68 अरब रुपये का टेंडर दिए जाने पर विवाद।
भाजपा MLC ने भ्रष्टाचार और कार्टलाइजेशन के आरोप लगाए।
NAFED और ICDS की भूमिका पर भी उठे सवाल।
मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज।

नोट: आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों की जांच और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही होगी।

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