सपा के नए टिकट वितरण मानदंडों पर उठे सवाल, क्या ‘डिनर पॉलिटिक्स’ और सत्ता के आगे झुकने वाले नेता होंगे बाहर?
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
लखनऊ। समाजवादी पार्टी द्वारा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण के नए मानदंडों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के प्रचारित मानकों के अनुसार टिकट वितरण में जनता की राय, जमीनी सर्वे, शिक्षा, ईमानदारी, सामाजिक योगदान, समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान तथा सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। साथ ही धनबल, बाहुबल और परिवारवाद को समाप्त करने का दावा भी किया गया है।
यदि वास्तव में समाजवादी पार्टी इन पांच प्रमुख बिंदुओं को कठोरता से लागू करती है, तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाले, सत्ता के सामने झुकने वाले तथा तथाकथित “डिनर पॉलिटिक्स” करने वाले अनेक नेता इस कसौटी पर खरे नहीं उतर पाएंगे।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जनता के बीच लगातार संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं और केवल बड़े नेताओं के साथ मंच साझा कर फोटो खिंचवाने वाले नेताओं के बीच स्पष्ट अंतर है। यदि टिकट का आधार वास्तव में जमीनी संघर्ष, जनसेवा और सामाजिक स्वीकार्यता बनता है, तो उन नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिनकी पहचान केवल राजनीतिक भोज, निजी संबंधों और अवसरवादी राजनीति तक सीमित रही है।
सपा द्वारा प्रचारित मानकों में कहा गया है
कि जनता की राय और सर्वे के आधार पर टिकट दिया जाएगा।
शिक्षा, ईमानदारी और सामाजिक योगदान को महत्व मिलेगा।
पुराने एवं समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान मिलेगा।
धनबल, बाहुबल और परिवारवाद को समाप्त किया जाएगा।
सामाजिक समरसता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि असली परीक्षा इन मानकों की घोषणा नहीं, बल्कि इनके पालन में है। यदि पार्टी प्रभावशाली धनकुबेरों, दबंग छवि वाले नेताओं या सत्ता से नजदीकी रखने वाले चेहरों को ही प्राथमिकता देती है, तो ये दावे केवल चुनावी प्रचार तक सीमित रह जाएंगे।
वहीं यदि संगठन वास्तव में जमीनी कार्यकर्ताओं, सामाजिक संघर्ष करने वाले युवाओं, शिक्षित और साफ छवि वाले प्रत्याशियों को अवसर देता है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया प्रयोग साबित हो सकता है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता भी यह देखना चाहती है कि क्या राजनीतिक दल अपने घोषित सिद्धांतों पर अमल करते हैं या फिर चुनाव आते ही पुराने समीकरण, जातीय गणित, धनबल और प्रभावशाली चेहरों को प्राथमिकता दी जाती है।
फिलहाल समाजवादी पार्टी ने एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, लेकिन अंतिम फैसला टिकट वितरण की सूची आने के बाद ही होगा। तब यह साफ हो जाएगा कि पार्टी ने वास्तव में “नया तरीका, नई सोच” अपनाई है या फिर यह केवल एक राजनीतिक नारा भर है।
यदि टिकट वितरण का आधार वास्तव में ईमानदारी, जनसंघर्ष और जनता की स्वीकार्यता बनाया गया, तो डिनर पॉलिटिक्स करने वाले, सत्ता के आगे झुकने वाले और अवसरवादी राजनीति के सहारे आगे बढ़ने वाले कई चेहरे इस कसौटी पर पूरी तरह फेल साबित हो सकते हैं। जनता अब घोषणाओं से ज्यादा उनके क्रियान्वयन को देखने के मूड में है।
"अगर सपा ने अपने घोषित पांच मानदंडों को ईमानदारी से लागू किया, तो सत्ता के आगे झुकने वाले, डिनर पॉलिटिक्स करने वाले और केवल अवसरवादी राजनीति के सहारे आगे बढ़ने वाले कई चेहरे 2027 की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।"
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