आज़ादी के बाद दलों में टूट का लंबा इतिहास, लेकिन बसपा रही अपवाद: कांग्रेस से लेकर भाजपा तक कई दल बंटे, नए दल बने और सत्ता तक पहुंचे
रिपोर्ट:मुस्तकीम मंसूरी
कांग्रेस, कम्युनिस्ट, जनसंघ, जनता दल, समाजवादी धारा और भाजपा तक टूट का सिलसिला जारी रहा, लेकिन 1984 में बनी बहुजन समाज पार्टी अब तक किसी बड़े विभाजन का शिकार नहीं हुई।
आजादी के बाद भारतीय राजनीति में दलों की टूट और नए दलों का उदय
भारतीय राजनीति का इतिहास केवल चुनाव और सरकारों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दलों के गठन, विभाजन और पुनर्गठन का भी इतिहास है। आजादी के बाद कांग्रेस से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी, जनसंघ, जनता दल, समाजवादी धारा और भारतीय जनता पार्टी तक शायद ही कोई बड़ा राजनीतिक दल ऐसा रहा हो जो टूट और बिखराव से अछूता रहा हो।
इन टूटों से अनेक नए राजनीतिक दल पैदा हुए,
जिनमें से कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सत्ता तक पहुंचे। इसके विपरीत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपनी स्थापना के बाद से अब तक बड़े राजनीतिक विभाजन से बची रही है।
कांग्रेस: सबसे अधिक टूट झेलने वाला दल
स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति थी, लेकिन समय के साथ इसमें कई विभाजन हुए।
1969 में कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर) का गठन हुआ।
1978 में कांग्रेस (आई) अस्तित्व में आई।
शरद पवार ने अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई।
ममता बनर्जी ने अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई।
जगनमोहन रेड्डी ने वाईएसआर कांग्रेस बनाई।
अनेक क्षेत्रीय दल कांग्रेस से निकलकर मजबूत राजनीतिक ताकत बने।
इनमें तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल और वाईएसआर कांग्रेस आंध्र प्रदेश में सत्ता तक पहुंचीं।
कम्युनिस्ट आंदोलन भी नहीं बचा
1964 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) से अलग होकर सीपीआई (एम) बनी। बाद में:
सीपीआई (एमएल)
लिबरेशन
नक्सलवादी संगठनों के अनेक गुट अलग-अलग रूपों में सामने आए।
जनसंघ से भाजपा तक
1951 में स्थापित भारतीय जनसंघ बाद में जनता पार्टी में विलय हुआ।
1980 में जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बनी। भाजपा आज देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति है, लेकिन वह भी विभाजनों से पूरी तरह अछूती नहीं रही।
भाजपा में भी हुए विद्रोह और अलग दल
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह ने भाजपा से अलग होकर 1999 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई।
हालांकि बाद में उनका भाजपा से पुनर्मिलन हो गया, लेकिन इस कदम ने यह साबित कर दिया कि भाजपा भी अंदरूनी असंतोष और टूट की राजनीति से पूरी तरह मुक्त नहीं रही।
इसी तरह:
उमा भारती ने भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाई।
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा बनाया।
शंकर सिंह वाघेला ने राष्ट्रीय जनता पार्टी बनाई।
हालांकि इनमें से अधिकांश दल बाद में कमजोर पड़ गए या अपने मूल दलों में लौट गए।
जनता दल: टूट का सबसे बड़ा उदाहरण
1988 में बना जनता दल शायद भारतीय राजनीति का सबसे अधिक विभाजित दल
साबित हुआ। जनता दल से निकलकर बने:
जनता दल (यूनाइटेड)
राष्ट्रीय जनता दल
बीजू जनता दल
लोक जनशक्ति पार्टी
जनता दल (सेक्युलर)
इनमें से कई दल बिहार, ओडिशा और कर्नाटक में सत्ता तक पहुंचे।
समाजवादी धारा भी लगातार बंटी
डॉ. राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से निकले अनेक दल समय-समय पर बने। इनमें प्रमुख है:
समाजवादी पार्टी
जनता दल
राष्ट्रीय जनता दल
जनता दल (एस)
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
समाजवादी राजनीति का इतिहास लगातार पुनर्गठन और विभाजन का इतिहास माना जाता है।
हाल के वर्षों में: शिवसेना और एनसीपी में भी विभाजन
शिवसेना दो भागों में बंटी।
एनसीपी शरद पवार और अजित पवार गुटों में विभाजित हुई।
इन घटनाओं ने साबित किया कि मजबूत से मजबूत दल भी टूट से नहीं बच सके।
बसपा क्यों बनी अपवाद?
1984 में मान्यवर कांशीराम द्वारा स्थापित बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
बसपा के कई नेता समय-समय पर पार्टी छोड़कर गए, लेकिन:
पार्टी का कोई बड़ा आधिकारिक विभाजन नहीं हुआ।
कोई प्रभावशाली समानांतर बसपा खड़ी नहीं हो सकी।
पार्टी का चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक ढांचा एकजुट बना रहा।
यही कारण है कि भारतीय राजनीति में बसपा को उन चुनिंदा दलों में गिना जाता है जो अपने गठन के बाद से बड़े संगठनात्मक विभाजन से बची रही हैं।
भारतीय राजनीति में दलों का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया रही है। कांग्रेस से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल, समाजवादी धारा और भाजपा तक अनेक दल विभाजन का शिकार हुए। इन टूटों से नए राजनीतिक दल पैदा हुए और कई सत्ता तक भी पहुंचे।
लेकिन बहुजन समाज पार्टी का उदाहरण अलग दिखाई देता है, जहां नेताओं के आने-जाने के बावजूद संगठन कभी दो फाड़ नहीं हुआ। यही कारण है कि भारतीय राजनीति में बसपा को संगठनात्मक एकजुटता के एक अनोखे उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
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