मंसूरी समाज की ताकत उसकी एकजुटता में है, गुटबाज़ी में नहीं: नियाज़ उद्दीन मंसूरी
रिपोर्ट: मुस्तकीम मंसूरी
"ताकत 'मैं' में नहीं, 'हम' में है, समाज की तरक्की का रास्ता एकजुटता से होकर जाता है"
मेहतवाड़ा (सीहोर) मध्य प्रदेश। मंसूरी समाज के वरिष्ठ समाजसेवी नियाज़ उद्दीन मंसूरी ने समाज की एकता, संगठन और सामाजिक जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि मंसूरी समाज की तरक्की केवल मंचों से दिए जाने वाले भाषणों और बड़े-बड़े दावों से नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर किए जाने वाले कार्यों से सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता आपसी भाईचारे, सहयोग और सामूहिक नेतृत्व की है। संगठन और गुट बनाना आसानु है, लेकिन समाज के हर व्यक्ति को साथ लेकर चलना और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करना ही सच्ची सामाजिक सेवा है।
"बातों से नहीं, बदलाव से बनेगी समाज की पहचान"
नियाज़ उद्दीन मंसूरी ने कहा कि हमें केवल योजनाएं और नारे नहीं देने हैं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहयोग और ज़रूरतमंद परिवारों की मदद के लिए धरातल पर उतरकर काम करना होगा। जब समाज का सक्षम वर्ग कमजोर और जरूरतमंद लोगों का हाथ थामेगा, तभी वास्तविक परिवर्तन दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि समाज के अंदर ऊंच-नीच, छोटे-बड़े, क्षेत्रवाद और गुटबाज़ी जैसी मानसिकताओं को समाप्त करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। समाज का हर व्यक्ति सम्मान और बराबरी का हकदार है।
"राय-मशवरे से होगा समाज का नेतृत्व"
उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की सोच या मनमानी से नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों, युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और बुद्धिजीवियों की राय लेकर निर्णय लिए जाने चाहिए। सामूहिक नेतृत्व ही समाज को मजबूत और प्रभावशाली बना सकता है।
"मंसूरी समाज एक विशाल शक्ति है"
नियाज़ उद्दीन मंसूरी ने कहा कि मंसूरी समाज केवल एक बिरादरी नहीं, बल्कि पूरे भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैला हुआ एक विशाल सामाजिक परिवार है। यदि समाज के लोग एक बैनर, एक विचार और एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ें तो शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक भागीदारी के हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकते हैं।
"समाज को बांटने वाली ताकतों को देना होगा जवाब"
उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुटता का परिचय दें और समाज को बांटने वाली ताकतों को लोकतांत्रिक और सामाजिक एकता के बल पर करारा जवाब दें।
अपने बयान के अंत में नियाज़ उद्दीन मंसूरी ने कहा—
"शाखों से टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम,
मंसूरी समाज से कह दो कि एक होकर रहें, अब बिखरने वाले नहीं हैं हम।"
उन्होंने कहा कि "ताकत 'मैं' में नहीं, 'हम' में है। जब तक हम अलग-अलग उंगलियां रहेंगे, कोई भी हमें कमजोर कर सकता है, लेकिन जिस दिन हम एक मुट्ठी बन गए, उस दिन समाज को नई दिशा, नई पहचान और नया मुकाम मिलने से कोई नहीं रोक सकेगा।"
मंसूरी समाज एक है, एक रहेगा—मंसूरी समाज ज़िंदाबाद!
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