लखनऊ में स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर आयोग का सख्त एक्शन, देरी पर रोजाना 1 लाख रुपये जुर्माने की तैयारी



रिपोर्ट-फिरदौस वारसी 

रिचार्ज के 2 घंटे बाद भी बिजली कनेक्शन न जुड़ने पर कड़ा रुख, पावर कारपोरेशन के एमडी को नोटिस; 15 दिन में मांगा जवाब, लाखों उपभोक्ता प्रभावित

लखनऊ: राजधानी लखनऊ में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की गड़बड़ियों को लेकर बिजली नियामक आयोग ने सख्त रुख अपना लिया है। रिचार्ज के बाद भी तय समय—2 घंटे—में बिजली कनेक्शन बहाल न होने के मामलों को गंभीर लापरवाही मानते हुए पावर कारपोरेशन के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
आयोग ने इस मामले में पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक (एमडी) को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही संकेत दिया गया है कि नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर रोजाना 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

बड़ी संख्या में उपभोक्ता प्रभावित

प्रदेश में अब तक करीब 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 70 लाख से अधिक मीटर प्रीपेड मोड में हैं। इन व्यवस्थाओं के चलते करीब 1.93 लाख उपभोक्ता सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। शिकायतें सामने आई हैं कि रिचार्ज के कई घंटे बाद भी बिजली कनेक्शन बहाल नहीं हो रहा।

नियमों का हो रहा व्यापक उल्लंघन

नियम के मुताबिक रिचार्ज के 2 घंटे के भीतर बिजली कनेक्शन जोड़ना अनिवार्य है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार लगभग 95% मामलों में यह समयसीमा पूरी नहीं हो पा रही है। कुछ दिनों में तो केवल 77% कनेक्शन ही समय पर जोड़े गए, जिसे आयोग ने “घोर लापरवाही” करार दिया है।

सीएम योगी पहले ही जता चुके हैं नाराजगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्मार्ट मीटर व्यवस्था की खामियों को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। इसके बावजूद समस्याओं का समाधान न होना सरकार और बिजली विभाग दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि बिना उपभोक्ताओं की सहमति के मीटर को प्रीपेड मोड में बदलना गलत है। साथ ही 70 लाख मीटर को फिर से पोस्टपेड करने की मांग भी की गई है।

आयोग की सख्ती से बढ़ा दबाव

आयोग ने साफ कहा है कि उपभोक्ताओं को समय पर बिजली सेवा देना बिजली कंपनियों की जिम्मेदारी है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इस पूरे मामले के बाद प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और अब सभी की नजर आयोग के अगले कदम और पावर कारपोरेशन के जवाब पर टिकी है।

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