बरेली स्वास्थ्य विभाग में फिर गरमाया भ्रष्टाचार का मामला: क्या सीएमओ बचा रहे हैं अपने चहेते अधिकारी को?



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

डिप्टी सीएम की नाराज़गी के बाद चार्ज से हटाए गए अधिकारी को फिर मलाईदार पद देने की तैयारी के आरोप, सामाजिक संस्था शासन स्तर पर जांच की करेगी मांग

बरेली। स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभागीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की नाराज़गी के बाद जिन अधिकारी को विभिन्न महत्वपूर्ण चार्जों से मुक्त किया गया था, उन्हें पुनः महत्वपूर्ण एवं मलाईदार पदों की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं। इसके अलावा विभिन्न समाचार माध्यमों में भी उनके कार्यकाल से जुड़े मामलों की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हो रही थीं। बताया जाता है कि बढ़ते विवाद और उच्च स्तर पर पहुंची शिकायतों के बाद उक्त अधिकारी से कई महत्वपूर्ण चार्ज वापस ले लिए गए थे तथा उनका स्थानांतरण भी कर दिया गया था।

स्थानांतरण कार्रवाई थी या विवाद शांत कराने की रणनीति?

अब विभाग के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि उस समय की गई कार्रवाई वास्तव में प्रशासनिक आवश्यकता थी या फिर डिप्टी सीएम की नाराज़गी को शांत करने तथा लगातार उठ रहे सवालों पर अस्थायी विराम लगाने का प्रयास।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई लोगों का मानना है कि यदि अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर थे, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए थी। वहीं दूसरी ओर यह चर्चा भी है कि स्थानांतरण के बाद मामले को धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई।

फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की चर्चा

सूत्रों का दावा है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अपने करीबी माने जाने वाले इस अधिकारी को एक बार फिर विभाग के महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पदों का चार्ज सौंपने की तैयारी में हैं। यदि ऐसा होता है तो यह कदम प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल खड़े कर सकता है।
विभाग के जानकारों का कहना है कि जिस अधिकारी पर लगातार आरोप लगते रहे हों, उसे बिना किसी स्पष्ट जांच रिपोर्ट के पुनः संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपना कई नए सवालों को जन्म देगा।

सामाजिक संस्था पहुंचाएगी मामला शासन तक

सूत्रों के अनुसार एक सामाजिक संस्था के पदाधिकारी जल्द ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। संस्था के प्रतिनिधि कथित भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और शिकायतों का ब्योरा प्रस्तुत कर शासन स्तर से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि संस्था का मानना है कि यदि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

'उच्चस्तरीय जांच हुई तो बचाव मुश्किल'

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि यदि शासन स्तर से निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाती है तो कई मामलों का खुलासा हो सकता है। अधिकारी का कहना है कि जांच की स्थिति में किसी भी स्तर पर संबंधित अधिकारी को बचा पाना आसान नहीं होगा।
हालांकि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बड़ा सवाल: डिप्टी सीएम का आदेश भारी पड़ेगा या सीएमओ की पसंद?

पूरा मामला अब स्वास्थ्य विभाग के गलियारों से निकलकर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। एक ओर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर आरोपों के घेरे में रहे अधिकारियों को दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन स्तर पर इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है। क्या डिप्टी सीएम की नाराज़गी और कथित निर्देशों को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर विभागीय स्तर पर अधिकारी को पुनः प्रभावशाली पदों पर स्थापित करने की कोशिश सफल होगी? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

नोट: यह समाचार विभागीय सूत्रों, शिकायतकर्ताओं और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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