सरकारी दफ्तरों से गायब हुआ शिष्टाचार, दलालों को चाय-पानी, वरिष्ठ पत्रकारों से बेरुखी
भ्रष्टाचार की छांव में मर रही अफसरशाही की नैतिकता, सीनियर सिटीजन पत्रकारों का हो रहा अपमान।
* कमाई कराने वालों को कुर्सी, सवाल पूछने वालों से मुंह फेरते हैं अफसर
नगीना- सरकारी विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार और चापलूसी के चलते अधिकारी-कर्मचारी अब शिष्टाचार भी भूलते जा रहे हैं। हालात ये हैं कि विभागों में दलालों और कमीशनखोरों को तो कुर्सी पर बैठाकर चाय-पानी से स्वागत होता है, लेकिन जनहित के सवाल लेकर पहुंचे वरिष्ठ सीनियर सिटीजन पत्रकारों को खड़े-खड़े ही टरका दिया जाता है।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अधिकारियों की 'कमाई' कराने वाला पहुंचता है तो उसे बड़े सम्मान के साथ अपने पास बैठाकर आवभगत की जाती है। वहीं, यदि कोई वरिष्ठ पत्रकार किसी खबर की जानकारी लेने या जनसमस्या को लेकर अधिकारी से मिलने जाता है तो उसे न तो बैठने के लिए कहा जाता है और न ही पानी के लिए पूछा जाता है। अधिकारी मोबाइल में व्यस्त होने का नाटक कर बात टाल देते हैं। थक-हारकर वरिष्ठ पत्रकारों को बिना जानकारी लिए ही लौटना पड़ता है।
पहले हर सरकारी विभाग में शिष्टाचार का बोलबाला था। कार्यालय पहुंचे वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानपूर्वक बैठाकर, पानी पिलाकर जानकारी दी जाती थी। इससे प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल बना रहता था। लेकिन अब हालात उलट हैं। शिष्टाचार की जगह बेरुखी ने ले ली है।
वरिष्ठ पत्रकारों ने मांग की है कि डीएम व एसपी बिजनौर सभी विभागों के अधिकारियों को शिष्टाचार पालन के निर्देश जारी करें। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यदि अपमानित होगा तो जनसमस्याएं कैसे उजागर होंगी?
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