मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों को ध्वस्त करने की किसी भी कोशिश का देशभर के मूलनिवासी और संविधानवादी नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे: राजुद्दीन गादरे
नई दिल्ली।
बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजुद्दीन गादरे ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थान को कमजोर करना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसी एक धर्म, जाति या समुदाय की संपत्ति नहीं होते, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर होते हैं।
उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स, समाज के सहयोग और वर्षों की मेहनत से विश्वविद्यालय बनते हैं। उन्हें नष्ट करना या उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा करना शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और संविधान की भावना के विरुद्ध है। विश्वविद्यालय खड़े करना आसान नहीं, इसके लिए दूरदृष्टि, संकल्प और समाज के सामूहिक योगदान की आवश्यकता होती है।
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, पत्रकारिता और राष्ट्रीय शिक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ थे। उन्होंने द कॉमरेड और हमदर्द जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से ब्रिटिश शासन का वैचारिक प्रतिरोध किया तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसके प्रथम वाइस-चांसलर बने।
उन्होंने कहा कि आज यदि उनके नाम पर स्थापित किसी शैक्षणिक संस्थान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास होता है, तो यह शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर हमला माना जाएगा।
राजुद्दीन गादरे ने आरोप लगाया कि कुछ लोग संवैधानिक पदों पर रहते हुए भी संविधान की मूल भावना, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सद्भाव के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई सार्वजनिक पद पर रहते हुए संविधान के विपरीत कार्य करता है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उसे पद छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने देश के नागरिकों से अपील की कि शिक्षा, संविधान और वैज्ञानिक सोच की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होकर आवाज़ उठाएं।
— राजुद्दीन गादरे
राष्ट्रीय प्रवक्ता
बहुजन मुक्ति पार्टी
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